भारत एक बहुभाषी देश है जहाँ भाषा ही संस्कृति की आत्मा है। हर राज्य की अपनी भाषा है, और हर भाषा में उस क्षेत्र की सभ्यता, परंपरा, लोककला और सोच का सुंदर प्रतिबिंब दिखाई देता है।
आज हम जानेंगे भारत की Top 10 सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओं के बारे में, जिनके माध्यम से करोड़ों लोग रोज़ अपनी भावनाएँ, व्यवसाय और संस्कृति व्यक्त करते हैं।
- हिंदी (528 मिलियन बोलने वाले)
हिंदी भारत की सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है। यह उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में प्रमुख भाषा है।
लिपि: देवनागरी
महत्व: भारत की राजभाषा, केंद्र सरकार की प्राथमिक कार्य भाषा।
संस्कृति: हिंदी साहित्य, कविताएँ, बॉलीवुड और शायरी के कारण इसकी लोकप्रियता अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँची है।
प्रसिद्ध लेखक: प्रेमचंद, हरिवंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा।

- बांग्ला (97 मिलियन बोलने वाले)
बांग्ला या बंगाली भाषा मुख्यतः पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में बोली जाती है।
लिपि: बंगाली
महत्व: नोबेल विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की भाषा, जिसकी काव्य धारा ने पूरे विश्व को प्रभावित किया।
संस्कृति: दुर्गा पूजा, बंगाली गीत, साहित्य और रोसोगुल्ला जैसी मिठाइयों में इसकी मिठास झलकती है।

- मराठी (83 मिलियन बोलने वाले)
मराठी महाराष्ट्र की प्रमुख भाषा है।
लिपि: देवनागरी
महत्व: छत्रपति शिवाजी महाराज और पेशवा साम्राज्य से जुड़ी यह भाषा वीरता, भक्ति और ज्ञान की प्रतीक है।
संस्कृति: लावणी, तमाशा, गझल, और संत तुकाराम, ज्ञानेश्वर जैसे संतों की रचनाएँ इसकी धरोहर हैं।
- तेलुगु (81 मिलियन बोलने वाले)
तेलुगु आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की प्रमुख भाषा है।
लिपि: तेलुगु लिपि
महत्व: इसे “इटली ऑफ द ईस्ट” कहा जाता है क्योंकि इस भाषा में शब्दों का उच्चारण मधुर और सरल होता है।
संस्कृति: कूचिपुड़ी नृत्य, फिल्मों का विशाल बाजार (Tollywood), और त्यौहारों में रचे-बसे गीत।
- तमिल (69 मिलियन बोलने वाले)
तमिल, तमिलनाडु की भाषा, दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है।
लिपि: तमिल लिपि
महत्व: 2000 साल से ज्यादा पुराना साहित्य।
संस्कृति: भरतनाट्यम, मंदिर वास्तुकला, संगम साहित्य और सुपरस्टार रजनीकांत से लेकर मुरुगन भक्ति तक हर क्षेत्र में इसका प्रभुत्व।

- गुजराती (55 मिलियन बोलने वाले)
गुजराती गुजरात राज्य की भाषा है।
लिपि: गुजराती लिपि
महत्व: महात्मा गांधी, सरदार पटेल जैसी विभूतियों की भाषा।
संस्कृति: गरबा, डांडिया, व्यापारिक मानसिकता और स्वादिष्ट भोजन जैसे ढोकला, खाखरा और थेपला।
- उर्दू (50 मिलियन बोलने वाले)
उर्दू उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बोली जाती है।
लिपि: पर्सो-अरबी
महत्व: शायरी, गज़ल और अदब की भाषा।
संस्कृति: मिर्ज़ा ग़ालिब, फैज़ अहमद फैज़ और जौन एलिया जैसे शायरों की कलम ने इसे अमर बना दिया।
- कन्नड़ (43 मिलियन बोलने वाले)
कर्नाटक की भाषा कन्नड़ है।
लिपि: कन्नड़
महत्व: कन्नड़ साहित्य में ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं की संख्या सबसे अधिक है।
संस्कृति: यक्षगान, हुग्गी, मैसूर पैलेस, और सुंदर कोडागु क्षेत्र इसकी पहचान हैं।
- उड़िया (37 मिलियन बोलने वाले)
उड़िया ओडिशा की भाषा है।
लिपि: उड़िया लिपि
महत्व: जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा, ओडिशा के शास्त्रीय नृत्य ओडिसी में इसकी मिठास महसूस की जाती है।
संस्कृति: छेना पोड़ा, रसगुल्ला और भगवान जगन्नाथ का भोग – महाप्रसाद।
- मलयालम (34 मिलियन बोलने वाले)
मलयालम केरल की भाषा है।
लिपि: मलयालम
महत्व: ‘God’s Own Country’ की सांस्कृतिक आत्मा इसी में बसती है।
संस्कृति: कथकली, मोहिनीअट्टम, मलयालम सिनेमा, और मलयाली साहित्य इसका गौरव बढ़ाते हैं।

भारत के पहचान
इन भाषाओं के बिना भारत की विविधता, पहचान और गौरव अधूरा है। हर भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी जड़ और हमारी अस्मिता की पहचान है।
अगर आपको यह लेख अच्छा लगा, तो इसे अपने दोस्तों, स्टूडेंट्स, और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों के साथ जरूर शेयर करें।