बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री अपनी “Files Trilogy” को पूरा करने आए हैं। The Tashkent Files और The Kashmir Files के बाद अब बारी है The Bengal Files की। यह फिल्म 5 सितंबर 2025 को रिलीज़ हुई और रिलीज़ के साथ ही चर्चा और विवाद दोनों का हिस्सा बन गई।
यह फिल्म हमें 1946 के Direct Action Day (Great Calcutta Killings) और Noakhali दंगों की तरफ ले जाती है। उस समय बंगाल में हुए साम्प्रदायिक दंगों ने लाखों लोगों को प्रभावित किया था। विवेक अग्निहोत्री इस भूले-बिसरे लेकिन बेहद संवेदनशील अध्याय को बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश करते हैं।

कहानी का सार
फिल्म की शुरुआत एक पत्रकार के रहस्यमय ग़ायब होने से होती है। इस केस की जांच सीबीआई अधिकारी शिवा पंडित (Darshan Kumaar) करता है। धीरे-धीरे कहानी हमें अतीत की तरफ ले जाती है जहाँ 1940 के दशक में हुए रक्तपात और विभाजन के बीज दिखाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, माँ भारती (Pallavi Joshi) अपनी यादों के ज़रिए बताती हैं कि कैसे बंगाल दंगों और सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हुआ। फिल्म में हमें राजनीति, साम्प्रदायिकता और वोट बैंक की सच्चाइयाँ दिखाई जाती हैं।
कहानी वर्तमान और इतिहास—दोनों टाइमलाइन को जोड़ते हुए आगे बढ़ती है।
मुख्य कलाकारों का अभिनय
Darshan Kumaar – ईमानदार सीबीआई अफसर के रूप में उनका अभिनय प्रभावशाली है। Pallavi Joshi – माँ भारती के किरदार में भावनात्मक गहराई जोड़ती हैं। Mithun Chakraborty और Anupam Kher – विशेष भूमिकाओं में हैं और अपने स्क्रीन प्रेज़ेन्स से असर छोड़ते हैं। Saswata Chatterjee – सरदार हुसैनी के रूप में दमदार अभिनय, राजनीति और धर्म का घालमेल दिखाते हैं। Simratt Kaur और Namashi Chakraborty – युवा कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाएँ अच्छे से निभाई हैं।

निर्देशन और तकनीकी पहलू
निर्देशन: विवेक अग्निहोत्री की पहचान है कि वे विवादास्पद और अनकही कहानियों को परदे पर लाते हैं। इस बार भी उन्होंने वही किया, लेकिन निर्देशन कभी-कभी भारी और एकतरफा लगता है। सिनेमाटोग्राफी: 1940 के दशक का बंगाल पुनर्जीवित करने की कोशिश की गई है। लोकेशन और सेट डिजाइन सराहनीय हैं। संगीत: बैकग्राउंड स्कोर गंभीर है, जो फिल्म की थीम को और गहरा बनाता है। लंबाई: लगभग 3 घंटे 25 मिनट की रनटाइम फिल्म को कहीं-कहीं खींची हुई महसूस कराती है।
क्या अच्छा है
- भूले-बिसरे इतिहास को सामने लाना।
- Pallavi Joshi और Darshan Kumaar का शानदार अभिनय।
- राजनीति और समाज को जोड़ने वाली पटकथा।
- भावनात्मक और सोचने पर मजबूर करने वाले दृश्य।

क्या कमजोर पड़ता है
- बहुत ज्यादा हिंसक दृश्य – फिल्म ग्राफिक और डिस्टर्बिंग हो जाती है।
- लंबाई – संपादन बेहतर हो सकता था।
- पक्षपात का आरोप – फिल्म पर आरोप है कि यह एकतरफा नजरिया दिखाती है।
- कुछ जगह संवाद नाटकीय और भारी लगते हैं।
विवाद
बंगाल में कई थिएटर मालिकों ने दावा किया कि उन पर फिल्म न दिखाने का दबाव डाला गया। फिल्म को CBFC से “A” सर्टिफिकेट मिला। कुछ परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके पूर्वजों को गलत तरीके से दिखाया गया।
फिल्म का संदेश
The Bengal Files हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि इतिहास केवल किताबों में नहीं, बल्कि समाज की स्मृति में भी दर्ज होना चाहिए। यह फिल्म एक याद दिलाती है कि सांप्रदायिक हिंसा की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ती है।

मेरी राय और रेटिंग
यह फिल्म इतिहास के कड़वे सच को सामने लाने की कोशिश है। अभिनय और विषय मजबूत हैं, लेकिन फिल्म की लंबाई और ज्यादा हिंसक दृश्य सामान्य दर्शकों के लिए भारी हो सकते हैं।
रेटिंग: 3/5)
इतिहास और राजनीति में रुचि रखने वालों के लिए – ज़रूर देखें।
मनोरंजन और हल्की-फुल्की फिल्म चाहने वालों के लिए – यह फिल्म भारी पड़ सकती है।
निष्कर्ष
द बंगाल फाइल्स सिर्फ़ एक फिल्म नहीं है, यह एक बहस है, एक सवाल है और एक आईना है। विवेक अग्निहोत्री ने एक बार फिर समाज को झकझोरने की कोशिश की है। यह फिल्म दर्शकों को बांधे रखती है, भले ही इसके तरीके और दृष्टिकोण पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
अगर आप भारतीय इतिहास के छिपे पहलुओं को जानना चाहते हैं और गहन सिनेमा देखने के शौकीन हैं, तो The Bengal Files आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होना चाहिए।